- "अगर आपके पास सोने की खदान है तो आप उसे किराये पर देंगे? जी नही खुदाई के लिए तुरंत फावड़ा उठायेंगे।" –गौरव
- "क्या भारत का लोकतन्त्र भ्रष्ट राजनेताओ के यहाँ गिरवी पड़ा है?" –जीतू
- "क्या विधान है, न्याय के मंदिर में ही न्याय का बलात्कार। वो भी पुजारी द्वारा!" – आशीष
- "अतीत गरीब की लुगाई हो गया, सब छेड रहे हैं।" –फुरसतिया
- "समय और परिस्थितियों के अनुकूल अपने को न बदल पाने के कारण बहुत से धर्म ग्रन्थों की जो (दुर्)गति हो गयी है, वह भारत के संविधान की न होने पाये।" –अनुनाद सिंह
- "निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारौं की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की" –तरूण
गिरवी लोकतन्त्र
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